Thursday, June 04, 2026

तुम को देखा तोह यह ख्याल आया

तुम को देखा तोह यह ख्याल आया
ज़िन्दगी धुप तुम घाना साया
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की..
आज फिर तुमने दिल को बहलाया ..
ज़िन्दगी धुप ..तुम घाना साया


आज फिर से कुछ लिकने का मन कर रहा है.. कुछ दिन ही ऐसा है ..आज कितने महीनो बाद बहित अच्छी नींद आयी सुकून भरी और शांत. कल रात जल्दी सू गयी थी फिर भी देर से नींद खुली.. पर बहुत ताज़ा महसूस कर रही थी. आज सुबह ध्यान नहीं कर पायी फिर भी अच्छा था .. नास्ता कर के मेल्स और मेस्सगेस चेक किया ..कुछ नया उम्मीद भरा नहीं था .. पर ज़िन्दगी में एक बहुत खूबसूतत चीज़ है .. मेरे गुरुदेव .. उनकी रील्स और दिल से निकले हुए उनके लिए गीत .. साथ में गुनगुनाना अच्छा लगता है उनके लिए .. और फिर और रील्स हनुमान जी की और कृष्णा की.. माहोल सुहाना होने लगा था .. और तब ही अँधेरा हो गया ..काली घटा छा गयी और तेज़ हवाओ ने मौसम को ठंडा और सुहावना कर दिया .. जैसा अंदर का मौसम था वैसा ही बहार का मौसम था. मन मल्हार गए रहा था .. और में गुरूजी और प्रकृति का धन्यवाद कर रही थी . शायद ही कभी कुछ गुरुदेव से माँगा हो और उन्होंने नहीं दिया .. ऐसा हो ही नहीं सकता .. और जो नहीं दिया उसमे भी मेरी प्रोटेक्शन ही है ..जो मेरे लिए बना ही नहीं.

मौसम इतना शानदार हो गया की क्या ही कहने .. ठण्ड हवाएं चल रही थी और थोड़ी ही देर में हलकी हलकी बूंदें भी पड़ने लगी. में अपनी बालकनी में खड़ी यूनिवर्स और गुरुदेव का धन्यवाद बार बार कर रही थी .. और मन गाना गुनगुना रहा था .." ठंडी हवायें ..लहरा के आये" .. "तुम को देखा तोह यह ख्याल आया.." देखा हज़ारो दफा आपको.. फिर बेकरारी कैसी है.. समभाले संभालता नहीं यह दिल.. कुछ आपमें बात ऐसी है .." .." श्री राम की गली में तुम आना ..वहां नाचते दिखेंगे हनुमाना .." और यह सभी गीत गाने गाते गाते .. मोस्सालाधर बारिश भी शुरू हो गयी और मेरे घर के सामने लगे सेमल के ऊँचे पेड़ ऐसे झूमने लगे की उनके भी मेरे गीत पर नाचना हो .. वह भी गुरुदेव का नाम सुन कर और महसूस कर के नाच रहे हो .. जिस पर बादल थप दे रहा हो और बूंदें मृदंग बजा रही हो .. क्या ही सुहावना मंज़र था .. और मेरा मन तोह क्या ही कहे ..इस प्रकृति की ख़ुशी में और ही झूम रहा था . बालकनी में खड़े कुछ हलकी हलकी बूंदें मुझ तक भी पहुंच जा रही थी पर मन थी की पूरा भीग जाने को कर रहा था ..

अभी बस खाना बना कर गैस बंद ही की थी और चावल पकने को रखा था .. बस मम्मी को चावल देखने को बोलकर में सीढ़ियों से नीचे उतर आयी बहार खुली बारिश में ..जब ठंडी ठंडी बूंदो नई शरीर को छुआ तोह लगा की सब मन पिघला जा रहा है और बारिश मन में ख़ुशी ठंडक भर रहा है इस गर्मी के मौसम में .. मेरे बहार आने पर बारिश और भी तेज़ हो झमाझम बरसने लगी ..उसे भी पता चल गया की में उस से मिलने को कितनी उतावली हो रही थी ... शहरो में लोग शायद ही बारिश में नाहा पाते हैं ..कुछ हिचल से ..कुछ शर्म से .. वंचित रह ही जाते हैं .. पर मैंने तो आज थान ही लिया था की प्रकृति की इस मनपसंद देन से में खुद को आज वंचित नहीं करुँगी ... मन मस्तिक पूरा ठंडा हो गया और ख़ुशी से भर गया ..

इस बीच मुझे मिक्कू की भी याद आयी ..उसको भी बारिश कितनी पसंद है और जब यहाँ होती थी तब कितना एन्जॉय करती थी . अब नौकर चाकर उसका ध्यान रखते हैं तब कहा ही प्रकृति को एन्जॉय और अनुभव करना और समझना रहता है. इसी सोच के बीच याद आया खुद से किया वादा की अब उसको याद नहीं करुँगी .. वह अपनी कहा ही रही .. उसकी माँ को तोह उसका हमारे साथ रहना और बात करना अच्छा ही नहीं लगता. तोह ध्यान उस से हटा प्रकृति से प्राथना की.. की तुम्हे उसे भी छू आना और थोड़ी ख़ुशी दे आना.. क्यूंकि तुम तोह वहां पर भी देख सकती हो ..पहुंच सकती हो जहा हम नहीं जा सकते.

तोह वापस आकर मैंने फटाफट नहाया दो मग पानी से जो बारिश के पानी जैसा ठंडी , ताज़ा और बटन नहीं था .. बस कपडे बदल कर में मम्मी को खाना खाने के लिए बुलाया और दोपहर का खाना थोड़ा देर हो जाने पर बाहर बारिश का मज़ा ले कर खाया गया .

मन में एक ही बात रही .. प्रकृति तुम्हे बहित बहुत बहुत धन्यवाद मेरी सखी बन ने के लिए.. गुरुदेव आपको दिल से शुक्रिया इतना खूबसूरत तोहफा देने के लिए

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